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Monday, 11 April 2022

महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन इरानी कल मुम्बई में पश्चिमी क्षेत्र के छह राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के ज़ोनल सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगी

 महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन इरानी कल मुम्बई में पश्चिमी क्षेत्र के छह राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के ज़ोनल सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगी




कुपोषण की चिंताओं के निराकरण तथा महिलाओं और बच्चों के विकास, सशक्तिकरण व सुरक्षा सम्बंधी रणनीतिक अंतःक्षेप पर ज़ोनल सम्मेलनों के जरिये राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों और हितधारकों से संपर्क




महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन इरानी 12 अप्रैल, 2022 को मुम्बई में पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और हितधारकों के ज़ोनल सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगी। इन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में महाराष्ट्र, राजस्थान, गोवा, गुजरात, मध्यप्रदेश, दादर एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव बैठक में हिस्सा लेंगे। हाल में आरंभ किये गये तीन मिशनों – पोषण 2.0, वात्सल्य और शक्ति के इष्टतम प्रभाव को सुनिच्शित करने के लिये महिला और बाल विकास मंत्रालय ने देश के हर ज़ोन में राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों तथा हितधारकों के साथ ज़ोनल परामर्श की श्रृंखला शुरू की है। ऐसी पहली बैठक दो अप्रैल को चंडीगढ़ में, दूसरी चार अप्रैल को बेंगलुरु में और तीसरी 10 अप्रैल, 2022 को गुवाहाटी में आयोजित की गई थी।


भारत की आबादी में महिलायें और बच्चे 67.7 प्रतिशत हैं। इनके सशक्तिकरण और सुरक्षा तथा उनका सुरक्षित वातावरण में आमूल विकास सुनिश्चित करना देश के सतत और समतावादी विकास तथा आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन का स्वरूप बदलने के लिये अति महत्त्वपूर्ण है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल में मंत्रालय की तीन सर्वसमावेशी योजनाओं को अभियान के तौर पर क्रियान्वित करने का निर्णय किया है। ये तीन मिशन हैं – मिशन पोषण 2.0, मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य। ये तीनों मिशन 15वें वित्त आयोग अवधि, 2021-22 से 2025-26 के दौरान कार्यान्वित किये जायेंगे। सर्वसमावेशी योजनों के तहत केंद्र द्वारा प्रायोजित योजनायें आती हैं, जिन्हें राज्य सरकारें/केंद्र शासित प्रदेश द्वारा साझा लागत नियमों के अनुसार  प्रायोजित किया जा रहा है। योजनाओं के दिशा-निर्देशों को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साझा किया जा रहा है।


महिला और बाल कल्याण मंत्रालय का मुख्य उद्देश्य है महिलाओं तथा बच्चों के लिये राज्यों की कार्रवाई के अंतराल को कम करना तथा अंतर-मंत्रालयी और अंतर-क्षेत्रीय सहयोग को प्रोत्साहन देना, ताकि लैंगिक समानता स्थापित हो, बच्चों को केंद्र में रखकर कानून बन सकें, नीति निर्माण हो सके तथा ऐसे कार्यक्रम तैयार हो सकें, जहां महिलाओं तथा बच्चों को वह माहौल मिले जो उनके लिये सुगम हो, वहनीय, भरोसेमंद तथा हर तरह के भेदभाव व हिंसा से मुक्त हो। इस दिशा में मंत्रालय उद्देश्यों की पूर्ति के लिये राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के समर्थन का आकांक्षी है, जिनके ऊपर मैदानी स्तर पर योजनाओं को चलाने की जिम्मेदारी है।


ज़ोनल सम्मेलनों का लक्ष्य है राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों को मंत्रालय के तीन सर्वसमावेशी मिशनों के प्रति संवेदनशील बनाना, जिसके आधार पर अगले पांच वर्षों के दौरान योजनाओं का समुचित क्रियान्वयन सहकारी संघवाद की सच्ची भावना के साथ हो सके, ताकि देश की महिलाओं और बच्चों के लाभ के लिये मिशनों के अंतर्गत सामाजिक बदलावों की परिकल्पना को पूरा किया जा सके।


मिशन पोषण 2.0 एक एकीकृत पोषण समर्थन कार्यक्रम है। इसके तहत बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और दुग्धपान कराने वाली माताओं में कुपोषण की चुनौतियों का समाधान किया जाता है। इसके लिये सर्व-समावेशी इको-सिस्टम बनाया गया है, जिसके जरिये स्वास्थ्य, आरोग्य और रोग-प्रतिरोधक क्षमता के विकास के सम्बंध में पोषण तत्त्वों तथा उनकी आपूर्ति के विषय में क्रांतिकारी कदम उठाये गये हैं। पोषण 2.0 के जरिये पूरक पोषण कार्यक्रम के तहत खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता तथा आपूर्ति को दुरुस्त किया जाता है। पोषण 2.0 में तीन महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों/योजनाओं -  आगनवाड़ी सेवाओं, किशोरियों के लिये योजना और पोषण अभियान समाहित होंगे ।


मिशन शक्ति में एकीकृत देखभाल, सुरक्षा, संरक्षा, पुनर्वास और सशक्तिकरण के जरिये महिलाओं को एक एकीकृत नागरिक-केंद्रित जीवन-पर्यन्त समर्थन देने की परिकल्पना है, ताकि महिलायें जीवन के विभिन्न चरणों से गुजरते हुये निर्बाध प्रगति कर सकें। मिशन शक्ति में दो उप-योजनायें ‘सम्बल’ और ‘सामर्थ्य’ हैं। जहां, ‘सम्बल’ उप-योजना महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा के लिये है, वहीं ‘सामर्थ्य’ उप-योजना महिलाओँ के सशक्तिकरण के लिये है।


मिशन वात्सल्य का उद्देश्य देश के हर बच्चे के लिये स्वस्थ्य और खुशहाल बचपन सुरक्षित करना, बच्चों के विकास के लिये संवेदनशील, सहयोगी और एक-साथ काम करने वाले इको-सिस्टम को मजबूत करना, किशोर न्याय अधिनियम, 2015 को लागू करने में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सहायता करना तथा सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करना है। मिशन वात्सल्य के घटकों में कानूनी निकायों, सेवा प्रदाता अवंसरचनाओं, संस्थागत देखभाल/सेवाओं, गैर-संस्थागत समुदाय आधारित देखभाल, आपातकालीन सेवाओं, प्रशिक्षण तथा क्षमता निर्माण शामिल हैं।

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