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Friday, 8 April 2022

धर्म एवं संस्कृति मानव जीवन के लिए कल्याणकारी

 धर्म एवं संस्कृति मानव जीवन के लिए कल्याणकारी 



- पुराने मठों एवं मंदिरों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता : शंकराचार्य 



 


न्यूज़ डेस्क : मधुबनी


मिथिला पुत्र एवं गोवर्धनमठ पूरी पीठाधीश्वर श्रीमज्जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती ने विशाल धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मिथिला की धरती आज भी पावन एवं पवित्र है। मिथिला की धर्म एवं संस्कृति मानव जीवन के लिए कल्याणकारी है। मिथिला नरेश राजा जनक ने यहां 27 - 27 पीढ़ी तक शासन किया है। विदेह राज जनक गृहस्थाश्रम में सन्यासी बनकर दुनिया को मनुष्य जीवन के अलौकिक शक्ति एवं महत्व से अवगत कराया है। जगतगुरु शंकराचार्य गुरुवार की रात करीब आठ बजे मिथिला की हृदयस्थली राज राजेश्वरी स्थान में विशाल धर्म सभा को संबोधित करते हुए यह बातें कही। विश्व में मानव जीवन के अन्य धर्म एवं पंथ की उत्पत्ति सनातन धर्म से ही होने की बात कहते हुए कहा कि वे अपने पूर्वजों की खोज करें। सनातन धर्म - संस्कृति , वेद - पुराण , उपनिषद में सभी तरह के ज्ञान -विज्ञान का रहस्य मिलता है। वेद मन्त्र में अणु एवं परमाणु की शक्ति है। दुनिया में अब तक जितनी भी गणित की किताब बनी है, उसमें आज के युग में भी वैदिक गणित के गणना का बराबरी संभव नहीं हो पाया है। मात्र 25 पेज वैदिक  गणित को सबसे सुपर कम्प्यूटर द्वारा करीब 1500 पेज में वर्णन किया गया है। कम्प्यूटर का आविष्कार करने वाले भी जगन्नाथपुरी के पीठाधीश्वर के शिष्य रहे हैं। जगतगुरु शंकराचार्य ने भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए सभी हिंदुओं को एक घण्टा समय एवं एक रुपया प्रतिदिन के हिसाब से देने की अपील किया। हिन्दू राष्ट्र बनाना सरकार का कार्य नही है।राज राजेश्वरी स्थान परिसर में गोवर्धनमठ पुरी पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य का भव्य स्वागत किया है। शंकराचार्य सबसे पहले राज राजेश्वरी मंदिर में स्थित अति प्राचीन गौरी शंकर के मूर्ति का दर्शन एवं पूजन किये। स्थानीय पंडितों ने वेद मंत्रोच्चारण से शंकराचार्य का स्वागत किया। स्वागत समिति के अध्यक्ष डॉ. गोविंद झा ने स्वागत भाषण किया और उनके द्वारा ही पादुका पूजन किया गया। शंकराचार्य के निजी सचिव स्वामी निर्विकल्पनानंद सरस्वती ने वेद मंत्रोच्चारण से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ गोविंद झा ने किया। मंच संचालन डॉ इंदिरा झा ने किया। कार्यक्रम की सफलता के लिए पूर्व मुखिया अजय कुमार झा, सेवा निवृत्त शिक्षक मोहन झा,चंदन झा, सतीश कुमार मिश्र, नथुनी झा, अमरनाथ झा, ललित झा उर्फ बड़ा बाबू,पीताम्बर झा सहित अन्य लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाया। 

शंकराचार्य स्वामी ने कहा कि गंगा नदी को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के गलत नीति ने मैला कर दिया है। अंग्रेज के जमाने में भी खड्यंत्र के तहत गंदगी को गंगा नदी में देने का योजना बनाया गया। वर्तमान  उत्तराखंड में निकलने वाली गंगोत्री के अलावे सभी जगह की गंगाजल को दूषित किया जा रहा है। देश के जल संसाधन मंत्री को अविलंब गंगा नदी बहने वाली गंदगी को बंद करना चाहिए।


जगतगुरु शंकराचार्य ने कहा कि सभी हिन्दू सनातन धर्म - संस्कृति की रक्षा के लिए एक घंटा और एक रुपया प्रत्येक दिन निकालने का कार्य करें जिससे सेवा , संवाद और सेना मजबूत हो सके। युवा शक्ति का सदुपयोग होना चाहिए।  विकास के नाम पर प्रकृत के साथ खेलवाड़ दुनिया की भविष्य के लिए सही नहीं है। सनातन धर्म ही एक माध्यम है जिसमें मानव जीवन के सभी सिद्धांत का विस्तार से सदियों से वर्णन है।सनातन सिद्धांत को दुनिया में कोई चुनौती नहीं दे सकता है। अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने भी अपने समय में इसे स्वीकार किया है। इंडोनेशिया की रानी ने दल बल के साथ अपने को हिन्दू घोषित किया है।

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