"आओ चलें संग्रहालय की ओर" विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
न्यूज़ डेस्क : मधुबनी
18:05:2026
दरभंगा : सोमवार को चंद्रधारी संग्रहालय एवं महाराजा लक्ष्मीेश्वर सिंह संग्रहालय, दरभंगा में विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर छात्र-छात्राओं को संग्रहालय के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से "आओ चलें संग्रहालय की ओर" विषयक एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम के मुख्य व्याख्याता ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के पुरातत्त्व विषय के शोधार्थी मुरारी कुमार झा और व्याख्याता भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसन्धान परिषद, नई दिल्ली के क्षेत्रीय अन्वेषक नीरज कुमार थे।
क्षेत्रीय अन्वेषक नीरज कुमार ने संग्रहालयों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, विश्व एवं भारत में संग्रहालय परंपरा के विकास, अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाए जाने के उद्देश्य तथा सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण में संग्रहालयों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने कहा कि संग्रहालय केवल पुरानी वस्तुओं के संरक्षण का स्थान नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और सामूहिक स्मृतियों को सुरक्षित रखने वाला जीवंत ज्ञान-केंद्र है।
मुख्य व्याख्याता श्री झा ने संग्रहालय का सामाजिक उत्थान में भूमिका, चंद्रधारी संग्रहालय एवं महाराजा लक्ष्मीेश्वर सिंह संग्रहालय, दरभंगा का परिचय, धरोहर का परिचय, विद्यार्थियों के लिए संग्रहालय, पुरातत्त्व, पर्यटन, संरक्षण, शोध, प्रकाशन आदि जैसे क्षेत्रों में भविष्यात्मक संभावनाओं के संबंध में विस्तार पूर्वक बताया। साथ ही उन्होंने मिथिला क्षेत्र की पुरातात्त्विक एवं सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से अपने आसपास की धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूक एवं संवेदनशील बनने का आह्वान किया।
इस अवसर पर टेराकोटा मृण्मूर्ति कला एवं उसकी सांस्कृतिक विविधता से संबंधित एक ज्ञानवर्धक फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। फिल्म के माध्यम से प्रतिभागियों को प्राचीन कला परंपराओं, लोकजीवन एवं सांस्कृतिक विकास की विभिन्न विशेषताओं से परिचित कराया गया।
कार्यक्रम के उपरांत प्रतिभागियों को दोनों संग्रहालयों का भ्रमण भी कराया गया, इस दौरान प्रतिभागियों ने संग्रहालय में सुरक्षित चंद्रधारी सिंह एवं दरभंगा राज के द्वारा प्रदत्त विभिन्न कला वस्तुएं, दुर्लभ हाथी दांत की कलाकृतियां, प्रतिमाओं, पुरावशेषों एवं ऐतिहासिक सामग्रियों का अवलोकन कर मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पुरातात्त्विक परंपरा को निकट से समझने का प्रयास किया।
इस दौरान विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के छात्र छात्राएं एवं शोधार्थी मौजूद रहे।



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