*सिंगापुर में मिथिला की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने संयुक्त राज्य अमेरिका के राजदूत डॉ. अंजनी के. सिन्हा सहित सभी का मन मोहा*
*सिंगापुर में ‘बिझार सांस्कृतिक समागम 2026’ ने जीवंत की बिहार-झारखंड की ऋतु-परंपराएँ और सांस्कृतिक विरासत*
सिंगापुर : 23 अगस्त 2026
बिझार (सिंगापुर) द्वारा आयोजित ‘बिझार सांस्कृतिक समागम 2026’ रविवार को सिविल सर्विस क्लब, टेसेंसोन में स्थित सीएससी सभागार में भव्य रूप से संपन्न हुआ। इस वर्ष के आयोजन का केंद्रीय विषय ‘ऋतु चक्र – जहाँ हर ऋतु उत्सव बन जाती है’ रहा। इसके माध्यम से बिहार और झारखंड की ऋतु-परंपराओं, लोकसंस्कृति, संगीत, नृत्य, कृषि, खान-पान और सामुदायिक जीवन को एक समग्र सांस्कृतिक प्रस्तुति के रूप में प्रस्तुत किया गया।
यह आयोजन 'बिझार' के लिए विशेष महत्व का रहा, क्योंकि वर्ष 2006 में स्थापित इस संस्था ने इस वर्ष अपनी 20वीं वर्षगांठ मनाई। पिछले दो दशकों में बिझार ने सिंगापुर में बसे बिहार और झारखंड से जुड़े परिवारों को एक साझा मंच प्रदान करते हुए सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण तथा उन्हें नई पीढ़ी तक पहुँचाने का निरंतर प्रयास किया है।
कार्यक्रम में सिंगापुर के संयुक्त राज्य अमेरिका के राजदूत, महामहिम डॉ. अंजनी के. सिन्हा अपनी धर्मपत्नी डॉ. कुंतला सिन्हा के साथ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं सिंगापुर के द्वितीय सचिव (वाणिज्य एवं वीज़ा), भारतीय उच्चायोग श्री अरविंद श्रीवास्तव अपनी धर्मपत्नी के साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ अतिथियों के पारंपरिक स्वागत एवं दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके पश्चात स्वागत संबोधन, सम्मान समारोह तथा विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यक्रम आगे बढ़ा। मुख्य प्रस्तुति ‘ऋतु चक्र’ ने बिहार और झारखंड के बदलते मौसमों, पर्व-त्योहारों, लोकजीवन तथा सांस्कृतिक परंपराओं की यात्रा को नृत्य, संगीत और कथात्मक प्रस्तुति के माध्यम से जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण सृष्टि फाउंडेशन, दरभंगा के कलाकारों की विशेष नृत्य-संगीत प्रस्तुति रही, जिसका मार्गदर्शन गुरु जय प्रकाश पाठक ने किया। कलाकारों ने शास्त्रीय अभिव्यक्ति, लोकनृत्य, संगीत और अभिनय के माध्यम से ऋतुओं तथा लोकपरंपराओं की सांस्कृतिक कथा को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
विशेष ओडिसी प्रस्तुति ‘जटायु मोक्ष’ ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। राग मोहना और एकताल पर आधारित इस अभिनयप्रधान प्रस्तुति में साहस, त्याग और भक्ति के भावों को सशक्त रूप से अभिव्यक्त किया गया। इसकी मूल नृत्य-रचना पद्म विभूषण गुरु श्री केलुचरण महापात्र की थी। प्रस्तुति में गुरु जय प्रकाश पाठक ने रावण तथा भगवान श्रीराम की भूमिकाएँ निभाईं, जबकि श्रुति सिंह ने माता सीता और जटायु की भूमिकाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम स्थल पर सुसज्जित ‘ऋतु चक्र कला दीर्घा’ भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसमें मकर संक्रांति, फगुआ, श्रावण, करमा, कोजागरा, जितिया, छठ महापर्व, सामा-चकेवा, अगहन सहित बिहार और झारखंड की अनेक ऋतु-परंपराओं को दृश्य कथाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम की दृश्य पहचान में मधुबनी और सोहराय लोककला से प्रेरित रूपांकनों का विशेष उपयोग किया गया।
आयोजन की एक महत्वपूर्ण विशेषता बिहार के विद्यार्थियों, उभरते कलाकारों तथा महिला कारीगरों की सक्रिय भागीदारी भी रही। अनेक कलाकृतियाँ और स्मृति-उपहार अष्टदल फाउंडेशन तथा जूट वाइब, बिहार से जुड़े प्रतिभाशाली विद्यार्थियों, कलाकारों और महिला कारीगरों द्वारा तैयार किए गए। विशेष ‘ऋतु चक्र उपहार-पोटली’ में हस्तचित्रित जूट की पोटली, पर्यावरण-अनुकूल जूट प्लांटर, बाँस की कलम, विशेष रूप से तैयार नोटपैड और पुस्तक-चिह्न शामिल थे।
बिझार की अध्यक्ष शिवानी खिरवाल, सचिव विनीता राय, कोषाध्यक्ष मनोज कुमार राय तथा न्यासी प्रकाश कुमार हेतमसरिया, अवधेश प्रसाद एवं राजन बगरिया ने इस आयोजन को संस्था की दो दशकों की गौरवपूर्ण यात्रा का अत्यंत भावपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि बिजहर की 20 वर्षों की यात्रा केवल आयोजनों की श्रृंखला नहीं, बल्कि सिंगापुर में बसे बिहार और झारखंड के लोगों की एकता, संस्कृति, परंपरा और आपसी जुड़ाव की जीवंत कहानी है।
उन्होंने इस अवसर को बिझार के उन सभी पूर्व पदाधिकारियों, सदस्यों, स्वयंसेवकों और शुभचिंतकों के योगदान को स्मरण करने का अवसर भी बताया, जिन्होंने वर्षों से संस्था को मजबूती प्रदान की है।
आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं बिझार के कोर समूह के सदस्य अंजनी कुमार चौधरी के संयोजन एवं निर्देशन में कार्यक्रम की सांस्कृतिक परिकल्पना, कलाकार समन्वय, मंचीय प्रस्तुति, कला दीर्घा, अतिथि सत्कार और आयोजन व्यवस्था को मूर्त रूप दिया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में अनेक प्रमुख कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका रही। भावना हेतमसरिया, मनोज कुमार राय, विनीता राय, ममता मंडल, राजेश कुमार, डॉ. सुमित कुमार सोनू, सारिका पांडेय, डॉ. रीमा कुमारी और सानिया शाह सहित अन्य सदस्यों ने अतिथि सत्कार, सांस्कृतिक समन्वय, पंजीकरण, सभागार व्यवस्था, भोजन प्रबंधन, सज्जा, प्रायोजक समन्वय तथा स्वयंसेवी कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। संस्था के वरिष्ठ सदस्यों एवं न्यासियों प्रकाश कुमार हेतमसरिया, अवधेश प्रसाद और राजन बगरिया ने भी निरंतर मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान किया। इन सभी के सामूहिक प्रयास, समर्पण और टीम भावना ने ‘सांस्कृतिक समागम 2026’ को सफल एवं यादगार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बिझार की सांस्कृतिक गतिविधियों में सिंगापुर में छठ पूजा का आयोजन भी विशेष स्थान रखता है। संस्था वर्षों से विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामुदायिक पहलों के माध्यम से प्रवासी परिवारों, विशेषकर बच्चों और युवाओं, को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का निरंतर प्रयास करती रही है।
‘बिझार सांस्कृतिक समागम 2026’ का मूल संदेश यही रहा कि—
“ऋतुएँ बदलती हैं, पीढ़ियाँ बदलती हैं, लेकिन संस्कृति तब तक जीवित रहती है, जब तक उसे सहेजा जाए, जिया जाए और अगली पीढ़ी तक पहुँचाया जाए।”
बिझार सांस्कृतिक समागम 2026 बिहार और झारखंड से सिंगापुर तक सांस्कृतिक निरंतरता, सामुदायिक एकता तथा विरासत के संरक्षण का एक यादगार उत्सव बनकर सामने आया। इस आयोजन ने न केवल प्रवासी समुदाय को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से पुनः जोड़ा, बल्कि बिहार और झारखंड की समृद्ध लोक एवं सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण कार्य भी किया।




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