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Tuesday, 26 April 2022

सुरक्षित प्रसव एप और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी को ले 28 अप्रैल को होगा प्रशिक्षण

 


सुरक्षित प्रसव एप और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी को ले 28 अप्रैल को होगा प्रशिक्षण


•जिले के हेल्थ एंड  वेलनेस सेंटर पर कार्यरत सीएचओ होंगे शामिल 

•एप से सुरक्षित प्रसव को मिलेगा बढ़ावा

•राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ सरिता ने सभी जिलों के सिविल सर्जन को जारी किया पत्र 


मधुबनी ,26 अप्रैल। मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आगामी 28 अप्रैल को दोपहर बाद 3 से 6 बजे के दौरान ज़ूम एप की मदद से सेफ डिलीवरी एप और हाई रिस्क प्रग्नेंसी को लेकर जिला के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (सीएचओ) की एक दिवसीय ट्रेनिंग होगी। इसको ले राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार (मातृ ) की राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ सरिता ने सभी जिलों के सिविल सर्जन को पत्र जारी किया है। सिविल सर्जन डॉ सुनील कुमार झा ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति से प्राप्त निर्देश के अनुसार जिला के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी को मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सेफ डिलीवरी एप एवं हाई रिस्क प्रग्नेंसी (एचआरपी) पर राज्य स्वास्थ्य समिति और जपाइगो की मदद से ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी। स्टेट हेल्थ सोसाइटी में मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम की स्टेट प्रोगमिंग ऑफिसर डॉ. सरिता और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के स्टेट प्रोग्रामिंग ऑफिसर डॉ. अजय शशि, जपाइगो के प्रतिनिधि के अलावा मैटरनल हेल्थ के एक्सपर्ट सभी सीएचओ को ट्रेनिंग देंगे।


 प्रशिक्षण में इन बिंदुओं पर होगी चर्चा :

 सिविल सर्जन डॉ  झा ने बताया प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित सभी सीएचओ से नार्मल लेबर और बर्थ, न्यू नेटल रेस्युसीएशन, इनिशियल मैनेजमेंट ऑफ कॉम्प्लिकेशन, आइडेंटिफिकेशन ऑफ डेंजर साइन ऑफ न्यू बोर्न और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी एंड पीएमएसएमए सहित कई तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। बताया सुरक्षित प्रसव कराने के लिए सेफ डिलेवरी एप कार्य करता है। इस प्रशिक्षण में गर्भावस्था एवं प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं के उपचार का सरल तरीका बताया जाएगा। प्रशिक्षण से स्टाफ नर्स, एएनएम का प्रसव संबंधी चिकित्सीय कौशल विकसित होगा। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन लगातार प्रयास कर रहा है। इसके लिए एक ओर प्रसव पूर्व जांच, संस्थागत प्रसव, होम बेस्ड न्यू बार्न केयर के साथ ही अन्य तमाम योजनाओं पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर तकनीकी पहलुओं पर भी पूरी तरह से फोकस किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सेफ डिलेवरी एप एक नवीनतम स्वास्थ्य उपकरण है। इसके द्वारा एनीमेटेड फिल्मों के माध्यम से बहुत ही सरल तरीके से प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं के उपचार के तरीके की जानकारी प्राप्त होती है । सेफ डिलिवरी एप के माध्यम से स्वास्थ्य इकाइयों में काम करने वाली स्टाफ नर्स और एएनएम के प्रसव संबंधी चिकित्सीय कौशल को विकसित किया जा सकेगा। स्वास्थ्य कार्यकर्ता इस एप को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से उपयोग कर सकते हैं। जिले की समस्त चिकित्सा इकाइयों के प्रसव कक्ष एवं मैटरनिटी ओटी में कार्यरत स्टाफ नर्स, एएनएम और चिकित्सा पदाधिकारियों द्वारा इतनी सारी खूबियों वाले इस एप के उपयोग कराने पर जोर दिया जा रहा है।


प्रसव के समय होने वाली परेशानियों की सूची, कारण, समस्या व निदान की जानकारी उपलब्ध है एप में:


ग्रामीण क्षेत्र में प्रसव कराने वाली एएनएम व स्टाफ नर्स के लिए सेफ डिलीवरी एप काफी मददगार है। यह एप प्ले स्टोर पर मुफ्त उपलब्ध है। इस एप में प्रसव के समय होने वाली परेशानियों की सूची, इसके कारण, समस्या व निदान की जानकारी व वीडियो उपलब्ध है, जिससे स्वास्थ्यकर्मी वीडियो देखकर प्रसव के समय ही उसका निदान कर सकें। मोबाइल में एप लोड करने के बाद पहली बार पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) करना पड़ता है। इसके बाद कर्मचारी बिना इंटरनेट सुविधा के भी जानकारियां देख सकते हैं।


सुरक्षित प्रसव को मिलेगा बढ़ावा :


डॉ सुनील कुमार झा का कहना है कि एप के आने से स्वास्थ्य कर्मियों को प्रसव से जुड़ी नई-नई जानकारियां आसानी ने मिल जाती हैं। प्रसव कक्ष में समय पर इलाज होने से जच्चा-बच्चा की जान बचती है। सुरक्षित प्रसव को भी बढ़ावा मिलेगा.

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