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Tuesday, 31 May 2022

सदर अस्पताल में मनाया गया विश्व तंबाकू निषेध दिवस

 सदर अस्पताल में मनाया गया विश्व तंबाकू निषेध दिवस



•स्वास्थ्यकर्मी, मरीज व उनके परिजन को दिलाई गई शपथ

•सभी सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों को किया जा चुका है तंबाकू मुक्त

• इधर-उधर थूकने पर जुर्माने का है प्रावधान

•तंबाकू उत्पादन के कचरे से पर्यावरण को हो रहा है भारी नुकसान:


मधुबनी,31मई। 

विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर सदर अस्पताल के एनसीडी कार्यालय व होमी भाभा कैंसर अस्पताल के डॉक्टर तथा एएनएम  हॉस्टल की छात्राओं के द्वारा  कार्यक्रम आयोजित कर मरीजों को तथा उनके परिजनों को तंबाकू के सेवन से होने वाले खतरनाक बीमारियों के बारे में जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों ने यह शपथ ली कि जीवन में हम कभी भी किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पादों का सेवन नहीं करेंगे एवं अपने परिजनों परिचितों को भी तंबाकू उत्पादों एवं किसी भी नशे का सेवन नहीं करने के लिए प्रेरित करेंगे। 


40% कैंसर सिर्फ तम्बाकू  सेवन से :

होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल एवं अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर के डॉ रविकांत ने कहा कि होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र तम्बाकू निषेध के लिए शुरू से प्रतिबद्ध रहा है। हम चाहते हैं कि आने वाले समय में टाटा मेमोरियल सेंटर में मधुबनी और बिहार से लोग इलाज के लिए नहीं आयें। तम्बाकू की रोकथाम के लिए  2 स्तरों पर काम कर रहे हैं। पहला सरकारों और संस्थाओं के साथ मिलकर व दूसरा समाज में जागरूकता अभियान चलाकर। उन्होंने कहा कि हमने कैंसर स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान की 16 जिलों में शुरुआत की है। कहा कि 40% कैंसर सिर्फ तम्बाकू के सेवन से होता है। बिहार में सबसे ज्यादा मुंह का कैंसर होता है। जिसमें 90% कैंसर तम्बाकू आदि के सेवन से होता है। तम्बाकू का सेवन करने सिर्फ अपना ही नहीं बल्कि आने वाली नस्लों को भी खराब कर देता है। अगर कोई गर्भवती महिलाएं तम्बाकू का सेवन करती है तो इससे उनके होने वाले बच्चे पर बुरा प्रभाव पड़ता है। जैसे जन्म के समय ही मृत्यु हो जाना, बच्चे का सही तरीके से विकास नहीं होना, कम वजन का बच्चा होना या कोई गम्भीर बीमारी से ग्रसित होना। तंबाकू का सेवन करने से आपके जीवन से 11 साल कम हो जाती है। तंबाकू सिर्फ हमारे स्वास्थ्य को ही नहीं बल्कि हमारे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा रहा है। इसीलिए तम्बाकू का सेवन सभी लोग अबिलम्ब छोड़ें। बताया कि बिहार में पहली बार जनसंख्या आधारित कैंसर रजिस्ट्री की शुरुआत की गयी है,उसमें हमें यह ज्ञात हुआ कि बिहार में मुँह का कैंसर सर्वाधिक है। 

होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल एवं अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ रविकांत सिंह ने इसी बात को आगे बढ़ाते हुए बताया कि हमलोग का स्लोगन ही है कि "तम्बाकू छोड़ें, विजेता बने।" आज हर तम्बाकू उत्पाद पर यह जरूर लिखा रहता है कि तम्बाकू स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है लेकिन फिर भी लोग इसका सेवन कर रहे हैं। उसमें से कई लोग कहते है कि इसकी लत लग गयी है जो नहीं छूट रही है। उनके लिए यह है कि प्रयास जारी रखें। तम्बाकू सेवन छोड़ना नामुमकिन नहीं है। भारत सरकार ने इसके लिए एक हेल्पलाइन न. भी जारी किया है। वह है 1800-11-2356। इस न. पर फोन करने पर विशेषज्ञ के द्वारा जबतक तम्बाकू नहीं छूटता तबतक काउंसिलिंग की जाती है। वहीं होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र में कार्यरत डॉ बुरहान ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि ज्यादातर लोग तम्बाकू का सेवन 17 से लेकर 22 उम्र तक के लोग ही शुरू करते है। ज्यादातर सेवन साथियों के दबाव के कारण ही शुरू होता है। जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी खराब हो जाती है। मुंह के कैंसर से ग्रसित 70 से 80 % लोगों की मृत्यु हो जाती है। 

डॉ बुरहान ने कहा कि अभी तक मैंने 100 से ज्यादा सर्जरी की है । जिसमें से 90% सर्जरी मुंह के कैंसर के ही थे। अगर हमलोग कम उम्र और वयस्कों में तम्बाकू जागरूकता अभियान चलाएंगे तो इसका फायदा मिलेगा। जागरूकता के कारण  लोग अगर जल्दी स्क्रीनिंग कराते हैं तो उसमें से 70% कैंसर के मामले कम हो सकते हैं। होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल एवं अनुसंधान केंद्र की चिकित्सा पदाधिकारी मधुबनी की डॉ रश्मि वर्मा ने बताया कि अब तक जिले में 13081 लोगों की स्क्रीनिंग की गयी है। जिसमें 44 लोग हाईली सस्पेक्टेड पाए गए हैं वहीं 11 लोगों में कन्फर्म लक्षण पाए गए हैं।


तंबाकू के कारण बिहार में हर साल बढ़ रहा 5844.63 टन प्लास्टिक अपशिष्ट कचरा :


 सीड्स के मनोज झा ने बताया तंबाकू उत्पाद पदार्थ सिर्फ हमारे स्वास्थ्य को ही नहीं बल्कि पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचा रहा है। सिगरेट, गुटका समेत तमाम तंबाकू खाद्य पदार्थ प्लास्टिक में पैक होते हैं, जिसे रिसाइकल नहीं किया जा सकता है। पर्यावरण पर हर रोज हजारों टन तंबाकू उत्पाद प्लास्टिक अपशिष्ट कचरा का बोझ बढ़ता जा रहा है। बिहार में हर साल सिगरेट से 35.02 टन, बीड़ी से 310.04 टन, धुआं रहित तंबाकू से 5492. 07 टन समेत अन्य तंबाकू से कुल 5844.63 टन प्लास्टिक अपशिष्ट कचरा का बोझ बढ़ रहा है। इसे देखकर विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2022 का थीम तंबाकू: हमारे पर्यावरण के लिए खतरा ' रखा गया है।


तंबाकू उत्पादन के कचरे से पर्यावरण को हो रहा है भारी नुकसान:


मनोज झा ने कहा कि उक्त रिपोर्ट आल इंडिया इंस्टीच्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज जोधपुर द्वारा दी यूनियन के तकनीकी सहयोग से 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 33 जिलों में अध्ययन करने के बाद जारी किया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि विश्व में 84 मेगावाट कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर सालाना ग्रीनहाउस गैस उत्पादन के साथ तंबाकू उद्योग, जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचाता है। विश्व में हर साल तंबाकू उगाने की वजह से 3. 5 मिलियन हेक्टेयर भूमि नष्ट हो जाती  और मिट्टी का क्षरण तथा फसलों को नुकसान होता है। 


बच्चों एवं युवाओं पर अधिक दुष्प्रभाव:

एनसीडीओ डॉ एस पी सिंह ने कहा कि तंबाकू का सबसे अधिक दुष्प्रभाव स्कूली बच्चों और युवाओं पर पड़ रहा है। बिहार में तंबाकू का प्रयोग करने वाले 25.9 प्रतिशत, धुआं रहित तंबाकू यानी पान मसाला, जर्दा, खैनी का प्रयोग करने वाले 23.5 प्रतिशत, बीड़ी पीने वाले 4.2 प्रतिशत और सिगरेट पीने वाले 0.9 प्रतिशत लोग हैं। तंबाकू सेवन के कारण कैंसर, ह्रदय रोग जैसी बीमारियों की समस्या बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि तंबाकू- सिगरेट व्यवसाय जैसे शक्तिशाली व्यावसायिक समूह से मुकाबला के लिए सामाजिक चेतना आवश्यक है.

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