"मिथिला की विरासत" विषय पर एकदिवसीय परिचर्चा आयोजित
न्यूज़ डेस्क : मधुबनी
11:04:2026
दरभंगा : शनिवार को मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, प्राकृतिक एवं पुरातात्त्विक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज(इंटैक) के दरभंगा चैप्टर एवं म. अ. रमेश्वरलता संस्कृत महाविद्यालय, दरभंगा के संयुक्त तत्वावधान में “मिथिला की विरासत” विषयक एक दिवसीय परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा का आयोजन डॉ. अयोध्या नाथ झा की अध्यक्षता में म. अ. रमेश्वरलता संस्कृत महाविद्यालय, दरभंगा के सभागार में हुआ।
इंटैक बिहार चैप्टर के समन्वयक भैरव लाल दास ने आगत अतिथियों का स्वागत एवं विषय प्रवेश कराया। साथ ही इंटैक दरभंगा चैप्टर के संगठनात्मक परिवर्तन की चर्चा करते हुए नव मनोनीत समन्वयक डॉ. सुशांत कुमार एवं सह समन्वयक डॉ. अयोध्या नाथ झा का स्वागत किया। उन्होंने इंटैक के क्रियाकलापों के संबंध में विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रो. प्रभाष चंद्र मिश्र, पूर्व संकायाध्यक्ष सामाजिक विज्ञान संकाय ने इंटैक के कार्यों की चर्चा करते हुए कहा कि - "मिथिला परिक्षेत्र में विरासतों की कमी नहीं है। इसके संरक्षण एवं संवर्धन की नितान्त आवश्यकता है।"
इंटैक के आजीवन सदस्य डॉ. धर्मेंद्र कुमर ने कहा कि - "स्थापना काल से ही दरभंगा चैप्टर अपेक्षा के अनुरूप कार्य नहीं कर सका था। किंतु, नवीन संगठनात्मक परिवर्तन से अपेक्षाएं अनुकूल लग रही हैं।
इंटैक के आजीवन सदस्य डॉ. अवनींद्र कुमार झा ने भाषा के संवर्धन पर जोर देते हुए कहा कि -"मैथिली भाषा के मूल स्वरूप को संरक्षित एवं इससे संबंधित इतिहासपरक अनुसंधानों में गति लाने की आवश्यकता है।"
म. अ. रमेश्वरलता संस्कृत महाविद्यालय की प्रभारी प्रधानाचार्या डॉ. ममता पांडे ने मैथिली भाषा की मधुरता एवं मिथिला की सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
इंटैक बिहार चैप्टर के सह समन्वयक डॉ. शिव कुमार मिश्र ने इंटैक के कार्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि - "इंटैक हमारी विविधतापूर्ण विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित करने का कार्य निरन्तर करती आ रही है। इंटैक ने छठ पर्व को विश्व धरोहर घोषित करने हेतु पहल की है। दरभंगा चैप्टर के गतिविधि से मिथिला के विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित करने में बल मिलेगा।"
प्रो. विद्यानाथ झा ने दरभंगा चैप्टर के पुनर्गठन पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि - "इंटैक अपनी विरासतों के प्रति समर्पित संस्था है। मृतप्राय नदियों की खोज, विरासत भवनों का संरक्षण, जन जागरूकता कार्यक्रम आदि आयोजित करते रहना इसे अधिक प्रभावशाली बनाता है और निश्चित रूप से इसका परिणाम स्थानीय आमजनों को विरासतों के प्रति उत्साहवर्धन के रूप में सामने आएगा।"
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. अयोध्या नाथ झा ने दरभंगा के विरासतों की चर्चा करते हुए कहा कि- "दरभंगा चैप्टर को कार्ययोजना बना कर के प्राथमिकता के आधार पर स्थानीय विरासतों का सर्वेक्षण एवं संरक्षण कार्य करने का आह्वाहन किया। मिथिला क्षेत्र की प्राचीन विरासत—जिसमें ऐतिहासिक स्थल, पुरास्थल, मंदिर, राज दरभंगा परिसर, पारंपरिक ज्ञान, लोक-संस्कृति एवं प्राकृतिक धरोहरें सम्मिलित हैं—के संरक्षण के प्रति जन जागरूकता उत्पन्न करने के साथ ही वैज्ञानिक एवं शोधपरक अध्ययन को यथा शीघ्र आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।"
डॉ. भास्कर नाथ ठाकुर, वैद्य गणपति नाथ झा, डॉ. राम प्रभाकर मिश्र, डॉ. जमील हसन अंसारी आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
धन्यवाद ज्ञापन इंटैक दरभंगा चैप्टर के समन्वयक डॉ. सुशांत कुमार ने किया।
इस अवसर पर डॉ. सुनील कुमार, तरुण कुमार मिश्र, मोदनाथ मिश्र, अनूप कुमार, दिवाकर सिंह, आशुतोष मिश्र, मुरारी कुमार झा, अल्का दास, पूर्णिमा कुमारी, डॉ. मैथिली कुमारी, प्रियंका कुमारी, सौरव कुमार, अभिमन्यु कुमार, विक्रम चौधरी, आनंद मोहन झा, अभय चंद्र के साथ ही सैकड़ों शोधार्थी, विद्यार्थी एवं धरोहर प्रेमी उपस्थित हुए।



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