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गुरुवार, 23 अप्रैल 2026

शिक्षा दान एवं समाजसेवा का पर्याय बनी डॉ. मीनाक्षी

 शिक्षादान और समाजसेवा का पर्याय बनी डॉ. मीनाक्षी 





रिपोर्ट : उदय कुमार झा 

मधुबनी : 23:04:2026



समाज में ऐसे कम इंसान होते हैं जो दूसरों की भलाई के बारे में सोचते हैं या समाज के प्रति कुछ करने की ललक रखते हैं । विशेषत: सरकारी नौकरी मिल जाने के बाद तो ज्यादातर लोग अपना भविष्य सुरक्षित जान अपने कर्तव्यों से भी मुँह मोड़ने लगते हैं। ऐसी विपरीत सोच रखनेवालों के बीच निरंतर रहते हुए अगर क़ोई अपने कर्तव्यों से आगे बढ़कर समाज के लिए कुछ करते हैं तो निश्चित रूप से ऐसे विराट व्यक्तित्व की सराहना होती है और होनी भी चाहिए। आज ऐसे ही एक शानदार व्यक्तित्व का उल्लेख मैं करने जा रहा जो मधुबनी ज़िले में प्रधानाध्यापिका हैं और अपने शानदार कामों के कारण उन्हें महामहिम राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जा चुका है । इस प्रधानाध्यापिका का नाम है  - डॉ. मीनाक्षी कुमारी।





           15.02.1980 ई. में दरभंगा जिला के लहेरियासराय निवासी डॉ. महेश चन्द्र चौधरी के घर एक कन्या शिशु का जन्म हुआ।  प्रारंभिक समय से ही मेधावी रही यह कन्या मीनाक्षी कुमारी आगे चलकर इतिहास, शिक्षा एवं हिंदी विषयों को लेकर स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की तथा बी.एड एवं पी.एच. डी. की उपाधि भी प्राप्त की। मीनाक्षी के पिता दरभंगा के कुंवर सिंह कॉलेज में रसायन शास्त्र के प्रोफेसर थे और विद्या ग्रहण करने के प्रति मीनाक्षी में लगन रहा । शादी के बाद भी ससुराल में मीनाक्षी को वही शैक्षिक वातावरण मिला क्योंकि उनके सास-ससुर सरकारी स्कूल में शिक्षक पद से अवकाश ग्रहण कर घर में रहते हैं एवं पतिदेव आईटीआई कॉलेज के निदेशक हैं। डॉ. मीनाक्षी 30.01.2014 से 25.07.2025 तक शिवगंगा बालिका प्लस टू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में इतिहास विषय की शिक्षिका के रूप में कार्यरत रही और छात्राओं को शास्त्र ज्ञान के साथ ही आधुनिक परिप्रेक्ष्य में खुद को सबला बनाने हेतु प्रेरित करती रही। 26.07.2025 से उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, सलहा, बेनीपट्टी में बिहार लोकसेवा आयोग द्वारा डॉ. मीनाक्षी कुमारी को प्रधानाध्यापक के पद पर प्रतिनियुक्त किया गया जहाँ वह तन - मन - धन से बच्चों को शिक्षा प्रदान करने में जुटी हैं ।

   

        डॉ. मीनाक्षी को सामाजिक कार्य, रक्तदान जागरूकता अभियान, वृक्षारोपण अभियान, सेनिटरी पैड वितरण, बाल विवाह रोकथाम, लड़कियों की शिक्षा एवं आत्मनिर्भरता, कैरियर मार्गदर्शन जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य हेतु विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जाता रहा है। पढ़ने -लिखने में रूचि के कारण शताधिक कविताओं एवं आलेखों का प्रकाशन विभिन्न पत्रिकाओं में हो चुका है । 24 वर्ष की आयु से मीनाक्षी ने लोगों की जिंदगी बचाने के लिए रक्तदान करना शुरू की और समाचार लिखे जाने तक 47 बार रक्तदान कर चुकी है तथा लड़कियों को भी रक्तदान हेतु प्रेरित करती रहती हैं । रक्तदान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु इन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय, बिहार सरकार द्वारा 2023-24 एवं 2024-25 में सम्मानित किया जा चुका है। माहवारी स्वच्छता प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य करने हेतु महिला एवं बाल विकास निगम, बिहार द्वारा 2023 ई. में सम्मानित किया गया। 2022 ई. में तत्कालीन शिक्षा मंत्री, बिहार सरकार चंद्रशेखर यादव द्वारा राजकीय शिक्षक पुरस्कार से डॉ. मीनाक्षी को सम्मानित किया गया। तत्पश्चात, महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के द्वारा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, 2024 से सम्मानित किया गया । इस प्रकार डॉ. मीनाक्षी को अबतक कई उल्लेखनीय पुरस्कार शिक्षा एवं समाजसेवा के क्षेत्र में दिया जा चुका है । 


    डॉ. मीनाक्षी कुमारी फिलहाल जिस विद्यालय की प्रधानाध्यापिका हैं, वहाँ स्कूल में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने को लेकर सतत प्रयत्नशील दिख रही हैं। जो बच्चे काम की वजह से स्कूल नहीं आते, उन्हें समझाकर प्रतिदिन स्कूल आने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इस नेक काम में राकेश राम, धर्मदेव रमण, मुकेश कुमार झा, समी हैदर, चंदा कुमारी, दुर्गानंद मंडल, राजेश झा, रवीन्द्र साफी एवं अन्य शिक्षक हर दिन डॉ. मीनाक्षी का साथ देते हैं। इतना ही नहीं, डॉ. मीनाक्षी शिक्षकों की अपनी टीम के साथ सलहा, खुटॉना, अधवारी, ठीकापट्टी, बराटपुर जैसे गाँवों के एक -एक घरों में जाकर बच्चों को स्कूल आनेके लिए प्रेरित की हैं। साथ ही, इन इलाकों के अंदर आनेवाले सारे कोचिंग संस्थानों को स्कूल के समय बन्द रखने की बात कही गई है। डॉ. मीनाक्षी का उद्देश्य है कि विद्यालय तक हर गाँव के सभी घरों के बच्चे पहुंचें । 

        शिवगंगा बालिका विद्यालय में सेवा के दौरान ज़ब क़ोई लड़की आकर कहती थी कि कहीं बाल विवाह हो रहा तो मीनाक्षी तुरन्त वहाँ पहुँचकर उस बाल विवाह को रुकवाने का भरपूर प्रयास करती थी और उसमें सफल भी होती रही । इसका नतीजा हुआ कि छात्राओं का भरोसा इस शिक्षिका पर हुआ और फलस्वरूप बाल विवाह जैसी कुरीति पर प्रहार होता रहा। अपने वेतन का कुछ हिस्सा डॉ. मीनाक्षी हमेशा बेटियों की शिक्षा पर खर्च करती हैं। अभी भी साल में कम से कम तीन बार रक्तदान जरूर करती हैं डॉ. मीनाक्षी, जो समाज के प्रति उनके कर्तव्यबोध का अहसास कराता है । 



             आज जरूरत इस बात की है कि ऐसी महिलाओं के सुकर्मों की  जानकारी लोगों को मिले जिससे दूसरे लोग भी प्रेरणा ग्रहण कर अपने समाज की भलाई के बारे में कुछ सोच सकें ।

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