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सोमवार, 15 जून 2026

कई शोधपरक आलेखों की प्रस्तुति एवं गंभीर विमर्श के साथ सम्पन्न हुआ प्रो. मुक्तिनाथ झा जन्म शतवार्षिकी कार्यक्रम

 कई शोधपरक आलेखों की प्रस्तुति एवं गंभीर विमर्श के साथ सम्पन्न हुआ प्रो. मुक्तिनाथ झा जन्म शतवार्षिकी कार्यक्रम








न्यूज़ डेस्क : मधुबनी 

15:06:2026




गंगौली : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली एवं साहित्यिकी,सरिसब-पाही के संयुक्त तत्वावधान में प्रो मुक्तिनाथ झा शतवार्षिकी संगोष्ठी का आयोजन दूसरे दिन भी जारी रहा।आज हुए तीसरे सत्र की अध्यक्षता श्री शैलेन्द्र आनन्द ने किया।इस सत्र में डॉ अजीत मिश्र ने प्रो मुक्तिनाथ झा के अप्रकाशित कृतियों में सन्निहित विचार वैशिष्ट्य एवं भावभूमि पर प्रकाश डाला।दूसरे वक्ता डॉ कृष्णानन्द मिश्र ने औपनिवेशिक सांस्कृतिक हस्तक्षेप एवं भाषा की राजनीति के परिप्रेक्ष्य में गीतांजलि की उपादेयता पर प्रकाश डाला।अपरिहार्य कारणवश अनुपस्थित डॉ अभिलाषा कुमारी का बुद्धायन केन्द्रित आलेख का पाठ डॉ अनुराग मिश्र ने किया तथा इस सत्र का संचालन भी उन्होंने ही किया।अन्तिम सत्र में श्री अमल कुमार झा ने प्रो मुक्तिनाथ झा के सारस्वत यात्रा में साहित्यिकी की भूमिका को रेखांकित किया वहीं डॉ अतुलेश्वर झा ने प्रो झा की अनुवाद कृति सावित्री स्वयँवर के विशिष्टता की विवेचना की।डॉ सत्येन्द्र कुमार झा ने प्रो मुक्तिनाथ झा की ‘स्वर्गच्युति ओ पुनरपि लभते स्वर्गम’ के कथानक,भाषा वैशिष्ट्य और अनुवाद कौशल का विस्तार से वर्णन किया।इस सत्र की अध्यक्षता डॉ विद्यानन्द झा तथा संचालन डॉ अजीत मिश्र ने किया।इस संगोष्ठी का एक सुखद पहलू यह रहा कि साहित्य अकादमी के उप सचिव श्री एन सुरेश बाबू ने प्रो मुक्तिनाथ झा की समस्त रचनाओं के प्रकाशन का आश्वासन मंच से दिया जो निश्चय ही अत्यंत हर्ष और आह्लाद का विषय रहा।

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