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रविवार, 9 अगस्त 2026

एक ओर शराबबंदी, दूसरी ओर सीमा पार मेडिकल गांजे की खेती को मंजूरी ! नेपाल के गंडकी प्रदेश के फैसले से सीमा सुरक्षा पर उठे सवाल

 एक तरफ शराबबंदी, दूसरी तरफ मेडिकल गांजे की खेती को मंजूरी! नेपाल के गंडकी प्रदेश के फैसले से सीमा सुरक्षा पर उठे सवाल






प्रभु मिश्रा : 09:08:2026



काठमांडू :  नेपाल के गंडकी प्रदेश ने गांजे की खेती को लेकर बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। प्रदेश में अब मेडिकल और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए गांजे की नियंत्रित खेती को कानूनी ढांचा मिल गया है। गंडकी प्रांतीय विधानसभा ने जुलाई 2026 में संबंधित विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया था। इसके तहत खेती के लिए सरकारी अनुमति लेना और निर्धारित क्षेत्रों में अधिकारियों की निगरानी में उत्पादन करना अनिवार्य होगा।


नेपाल में लंबे समय से गांजे की खेती, बिक्री और इस्तेमाल पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध रहा है। ऐसे में गंडकी प्रदेश का यह कदम देश में गांजे की खेती को लेकर एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव माना जा रहा है। हालांकि, प्रदेश का कानून इसे खुले तौर पर मनोरंजक इस्तेमाल या अनियंत्रित बिक्री की अनुमति नहीं देता, बल्कि खेती को मेडिकल और औद्योगिक उद्देश्यों तक सीमित रखने की व्यवस्था करता है।


भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ सकती है चुनौती


गंडकी प्रदेश सीधे बिहार की सीमा से सटा हुआ नहीं है, लेकिन नेपाल में गांजे की वैध एवं नियंत्रित खेती शुरू होने से पूरे भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में निगरानी और तस्करी रोकने की चुनौती को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। खासकर बिहार में शराबबंदी लागू होने के कारण सीमावर्ती इलाकों में पहले से ही अवैध शराब और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई है।


जानकारों के अनुसार, यदि मेडिकल खेती के लिए जारी लाइसेंस और उत्पादन की निगरानी व्यवस्था कमजोर पड़ती है, तो वैध उत्पादन की आड़ में अवैध बाजार तक गांजा पहुंचने का जोखिम पैदा हो सकता है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस फैसले से भारत में तस्करी निश्चित रूप से बढ़ेगी।


लाइसेंस और निगरानी के साथ होगी खेती


गंडकी के नए प्रावधानों के तहत गांजे की खेती केवल सरकार द्वारा निर्धारित क्षेत्रों में और अनुमति लेने के बाद की जा सकेगी। खेती की प्रक्रिया पर सरकारी निगरानी रखी जाएगी। इसका उद्देश्य मेडिकल और औद्योगिक उपयोग के लिए नियंत्रित उत्पादन को बढ़ावा देना है।


बिहार के लिए क्यों अहम है यह खबर?


भारत-नेपाल की खुली सीमा और दोनों देशों के बीच लगातार आवागमन को देखते हुए सीमावर्ती भारतीय राज्यों के लिए नेपाल में नशीले पदार्थों से जुड़े कानूनों में बदलाव महत्वपूर्ण माना जाता है। बिहार में शराबबंदी के बीच यदि सीमा पार से किसी भी प्रकार के मादक पदार्थ की अवैध आपूर्ति बढ़ती है, तो इसका सीधा असर सीमा सुरक्षा और स्थानीय कानून-व्यवस्था पर पड़ सकता है।


फिलहाल गंडकी प्रदेश का फैसला मेडिकल और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए नियंत्रित खेती तक सीमित है। आने वाले समय में इसकी निगरानी व्यवस्था और भारत-नेपाल सीमा पर इसका प्रभाव किस तरह सामने आता है, इस पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर रहेगी।

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