चंद्रधारी संग्रहालय, दरभंगा में 21 दिवसीय इंटर्नशिप कार्यक्रम का सफल समापन, इतिहास विषय के 169 प्रशिक्षुओं को प्रदान किए गए प्रमाण-पत्र
न्यूज़ डेस्क : मधुबनी
23:06:2026
दरभंगा : चंद्रधारी संग्रहालय, दरभंगा में नई शिक्षा नीति के अंतर्गत इतिहास एवं प्राचीन भारतीय इतिहास, पुरातत्त्व एवं संस्कृति विभाग के स्नातक सेमेस्टर-पाँच के विद्यार्थियों के लिए आयोजित 21 दिवसीय इंटर्नशिप कार्यक्रम का आज सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस अवसर पर कुल 169 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण पूर्ण करने के उपरांत प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
यह इंटर्नशिप कार्यक्रम 2 जून 2026 को आरंभ हुआ था, जिसके अंतर्गत विद्यार्थियों को संग्रहालय अध्ययन, धरोहर प्रबंधन एवं संग्रहालयीय व्यवहार के विभिन्न आयामों से परिचित कराया गया। प्रशिक्षण के दौरान संग्रहालय की अवधारणा एवं इतिहास, संग्रहालय प्रशासन एवं प्रबंधन, संग्रहालयीय संग्रह एवं उनके स्रोत, प्रलेखन एवं अभिलेखीकरण, पुरावशेषों एवं कलावस्तुओं का संरक्षण, संग्रहालय प्रदर्शन, शोध एवं प्रकाशन, संग्रहालय की शैक्षणिक एवं जन-जागरूकता गतिविधियाँ, आगंतुक सेवा तथा धरोहर व्याख्या जैसे विषयों पर सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
विशेष रूप से प्रशिक्षुओं को पुरास्थलों का प्रत्यक्ष सर्वेक्षण कराया गया तथा उन्हें क्षेत्रीय अध्ययन, अवलोकन, अभिलेखन और प्रतिवेदन निर्माण की व्यावहारिक विधियों से भी अवगत कराया गया। इस प्रशिक्षण ने विद्यार्थियों को कक्षाओं की सीमाओं से बाहर निकलकर इतिहास और पुरातत्त्व को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर प्रदान किया।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अंतर्गत स्नातक सेमेस्टर-पाँच के विद्यार्थियों के लिए 120 घंटे की इंटर्नशिप अनिवार्य की गई है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को कक्षा शिक्षण के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान, कौशल-आधारित शिक्षा तथा क्षेत्रीय अनुभव प्रदान करना है। इसी प्रावधान के अंतर्गत चंद्रधारी संग्रहालय, दरभंगा में यह इंटर्नशिप आयोजित की गई थी।
समापन समारोह को संबोधित करते हुए प्रशिक्षक-सह ल. ना. मि. वि. के पुरातत्त्व विषय के शोधार्थी श्री मुरारी कुमार झा ने सभी प्रशिक्षुओं को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह इंटर्नशिप केवल 120 घंटे का प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और धरोहरों को समझने की एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक यात्रा रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर अध्ययन, शोध-दृष्टि के विकास तथा अपनी सांस्कृतिक एवं पुरातात्त्विक विरासत के संरक्षण के प्रति संवेदनशील एवं उत्तरदायी बनने का आह्वान किया।
इस अवसर पर चंद्रधारी संग्रहालय, दरभंगा के अपर निदेशक डॉ. शंकर सुमन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए भविष्य के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि संग्रहालय केवल अतीत की स्मृतियों का भंडार नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और सामाजिक चेतना के केंद्र हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अधिकाधिक पठन-पाठन, शोध, क्षेत्रीय अध्ययन और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया तथा इतिहास के उच्च शिक्षा जगत में गंभीर अध्ययन और मौलिक शोध की आवश्यकता पर बल दिया।
इतिहास विषय में यूजीसी नेट जे.आर.एफ. जितेंद्र कुमार ने नेट परीक्षा की तैयारी करने हेतु सुझाव दिए।
कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षुओं की ओर से दिशा कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने ल.ना.मि.वि., महाविद्यालय, चंद्रधारी संग्रहालय प्रशासन, प्रशिक्षकों तथा सभी संसाधन व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस इंटर्नशिप ने हमलोगों को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर संग्रहालय, पुरातत्त्व और धरोहर अध्ययन की व्यावहारिक समझ प्रदान की है, जो हमारी भावी शैक्षणिक जीवन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
समारोह का समापन सभी प्रशिक्षुओं को प्रमाण-पत्र वितरण एवं उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाओं के साथ हुआ। यह इंटर्नशिप कार्यक्रम विद्यार्थियों में इतिहास, संग्रहालय विज्ञान, धरोहर संरक्षण तथा शोध के प्रति नई जागरूकता और उत्साह उत्पन्न करने में अत्यंत सफल सिद्ध हुआ।




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