प्रो. मुक्तिनाथ झा की साहित्य साधना सदा अनुकरणीय : एन. सुरेश बाबू
रिपोर्ट : उदय कुमार झा
14:06:2026
मधुबनी : सरिसब-पाही में साहित्य अकादमी एवं साहित्यिकी के संयुक्त तत्वावधान में मुक्तिनाथ झा द्विदिवसीय जन्म शतवार्षिकी कार्यक्रम की शुरुआत साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के उप सचिव एन. सुरेश बाबू के द्वारा स्वागत भाषण से हुई । उन्होंने अपने सम्बोधन में प्रो. मुक्तिनाथ झा को एक महान साहित्यकार बताते हुए उनके कृतित्व की भूरि भूरि प्रशंसा की।
विषय प्रवेश चित्रकूट विश्वविद्यालय, उत्तरप्रदेश के अवकाशप्राप्त प्रधानाचार्य एवं हिन्दी के लब्धप्रतिष्ठ विद्वान डॉ. अजय मिश्र ने किया। प्रो. मुक्तिनाथ झा की साहित्यिक प्रतिभा, व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर बीज भाषण मैथिली के प्रसिद्ध समालोचक रमानन्द झा "रमण" ने दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. जगदीश मिश्र ने साहित्यिकी के संबंधमे विस्तार से बताते हुए प्रो. मुक्तिनाथ झा के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। प्रथम सत्र में शिवशंकर श्रीनिवास की अध्यक्षता में जिष्णुनाथ झा एवं डॉ. अरविन्द कुमार सिंह झा ने आलेख पाठ किया। द्वितीय सत्र में डॉ. दमन कुमार झा की अध्यक्षता में प्रो. ईशनाथ झा, कंचन दीपा एवं अपर्णा कुमारी ने अपना - अपना आलेख पाठ किया । मंच संचालन डॉ. अजीत मिश्र एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अनुराग मिश्र ने किया ।
विद्वानों के इस कार्यक्रम में डॉ. गंगानाथ झा, डॉ. विद्यानंद झा, प्रबोध झा, अशर्फी कामत, निधि झा, रामबहादुर चौधरी, रतिनाथ झा,उदय कुमार झा,डॉ. इन्द्रनाथ झा, डॉ. शान्तिनाथ सिंह ठाकुर, पारस सिंह झा सहित लगभग शताधिक प्रबुद्ध जन उपस्थित थे।






कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें