Breaking

Post Top Ad

Your Ad Spot

मंगलवार, 22 सितंबर 2026

26 सितंबर को अगस्त्य-अर्घ्यदान, 27 से पितृपक्षीय पार्वण श्राद्ध : डॉ. राजनाथ झा

 26 सितंबर को अगस्त्य-अर्घ्यदान, 27 से पितृपक्षीय पार्वण श्राद्ध : डॉ. राजनाथ झा 






10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर महालया के साथ होगा पितृपक्ष का समापन




न्यूज़ डेस्क : मधुबनी 

22:09:2026



पटना : सनातन धर्म में पितृपक्ष पूर्वजों के स्मरण, पितृऋण के निर्वहन और कुलपरंपरा के संरक्षण का विशिष्ट काल माना गया है। इस अवधि में पितरों की निर्धारित तिथि के अनुसार पार्वण श्राद्ध, तर्पण, पिण्डदान, ब्राह्मण-सत्कार एवं भोजन, दक्षिणा तथा दान आदि कर्म किए जाते हैं। वर्ष 2026 में 26 सितंबर को अगस्त्य-अर्घ्यदान के बाद 27 सितंबर से पितृपक्षीय पार्वण श्राद्ध का क्रम प्रारंभ होगा और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या एवं महालया के साथ इसका समापन होगा।


दक्षिणाभिमुख होकर अगस्त्य ऋषि को अर्घ्य


पितृपक्ष के प्रवेशकाल में अगस्त्य-अर्घ्यदान की विशिष्ट परंपरा बताई गई है। स्नानादि से निवृत्त होकर शुद्ध वस्त्र धारण करने के बाद संकल्पपूर्वक दक्षिणाभिमुख होकर, जानु टेककर अगस्त्य ऋषि को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। परंपरा में अर्घ्यपात्र को मस्तक से स्पर्श कराने का भी विधान मिलता है।


अर्घ्य में पवित्र जल के साथ अक्षत, कुश, दूर्वा, श्वेत पुष्प और विशेष रूप से काश-पुष्प का प्रयोग किया जाता है। अगस्त्य-अर्घ्य से संबंधित स्तवन में काश-पुष्प का उल्लेख मिलता है—


काशपुष्पप्रतीकाश वह्निमारुतसम्भव।

मित्रावरुणयोः पुत्र कुम्भयोने नमोऽस्तु ते॥


अर्थात् काश-पुष्प के समान उज्ज्वल, मित्र-वरुण के पुत्र एवं कुम्भयोनि अगस्त्य ऋषि को नमन।


श्राद्ध और तर्पण एक नहीं


धर्मशास्त्रीय परंपरा में तर्पण और श्राद्ध को समानार्थक नहीं माना जाता। जलादि के माध्यम से पितरों की तृप्ति के लिए किया जाने वाला कर्म तर्पण है, जबकि पितृ की निर्धारित तिथि पर संकल्पपूर्वक किया जाने वाला व्यापक कर्म पार्वण श्राद्ध कहलाता है। इसमें परंपरा के अनुसार पितृपूजन, पिण्डदान, तर्पण, ब्राह्मण-सत्कार एवं भोजन, दक्षिणा तथा दान आदि कर्म होते हैं।


अर्थात् पिता, पितामह अथवा अन्य पितरों की निर्धारित तिथि पर किया जाने वाला संपूर्ण अनुष्ठान पितृपक्षीय पार्वण श्राद्ध है, जबकि तर्पण उसका एक प्रमुख अंग है।


पितृतर्पण में दक्षिणाभिमुखता और अपसव्य विधान


पितृतर्पण परंपरानुसार दक्षिणाभिमुख होकर अपसव्य स्थिति में कुश एवं तिलयुक्त जल से किया जाता है। पितृवंश के साथ मातृकुल के पितरों का भी स्मरण किया जाता है। पितृकर्म में केवल बाहरी विधि ही नहीं, बल्कि संकल्प, पितृनाम-स्मरण, कुलाचार और देशाचार का पालन भी महत्वपूर्ण माना गया है।


पितृपक्ष 2026 की प्रमुख तिथियां


तारीख| तिथि-कर्म

26 सितंबर| पूर्णिमा संबंधी पितृकर्म एवं अगस्त्य-अर्घ्यदान

27 सितंबर| कृष्ण प्रतिपदा पार्वण श्राद्ध

28 सितंबर| कृष्ण द्वितीया पार्वण श्राद्ध

29 सितंबर| कृष्ण तृतीया पार्वण श्राद्ध

30 सितंबर| कृष्ण चतुर्थी पार्वण श्राद्ध

1 अक्टूबर| कृष्ण पंचमी पार्वण श्राद्ध

2 अक्टूबर| कृष्ण षष्ठी पार्वण श्राद्ध

3 अक्टूबर| कृष्ण सप्तमी पार्वण श्राद्ध

4 अक्टूबर| कृष्ण अष्टमी पार्वण श्राद्ध

5 अक्टूबर| कृष्ण नवमी पार्वण श्राद्ध

6 अक्टूबर| कृष्ण दशमी पार्वण श्राद्ध

7 अक्टूबर| कृष्ण एकादशी पार्वण श्राद्ध

8 अक्टूबर| कृष्ण द्वादशी पार्वण श्राद्ध एवं मघा श्राद्ध

9 अक्टूबर| कृष्ण त्रयोदशी पार्वण श्राद्ध

10 अक्टूबर| कृष्ण चतुर्दशी, सर्वपितृ अमावस्या, महालया एवं पितृपक्ष का समापन


मिथिला में पंचांग और कुलाचार का महत्व


मिथिला की धार्मिक परंपरा में पितृकर्म के लिए स्थानीय पंचांग, कुलाचार और देशाचार को विशेष महत्व दिया जाता है। पितृ की मृत्यु की चन्द्र तिथि के आधार पर संबंधित तिथि में पार्वण श्राद्ध किया जाता है। इसलिए केवल अंग्रेजी तारीख देखकर पितृकर्म निर्धारित करने के बजाय स्थानीय प्रमाणिक पंचांग के अनुसार तिथि और पार्वणकाल का निर्धारण किया जाना चाहिए।


पितृपक्ष भारतीय परिवार-परंपरा में केवल कर्मकांड का काल नहीं, बल्कि पूर्वजों से प्राप्त संस्कार, ज्ञान, परंपरा और जीवन-मूल्यों के स्मरण एवं पितृऋण के निर्वहन का अवसर है। अगस्त्य-अर्घ्यदान से लेकर सर्वपितृ अमावस्या तक का यह क्रम स्मरण, संयम, तर्पण, दान और पारिवारिक संस्कारों की निरंतरता का संदेश देता है।


विशेष: विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय पंचांग, देशाचार और कुलाचार के कारण तिथि अथवा पार्वणकाल में अंतर संभव है। अतः अंतिम निर्णय के लिए संबंधित क्षेत्र के प्रमाणिक पंचांग एवं कुलाचार का अनुसरण किया जाना उचित है।



 ज्योतिषाचार्य डॉ राज नाथ झा , निदेशक ज्योतिर्वेद विज्ञान संस्थान सनातन वैदिक गुरुकुल दीप मधुबनी

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Post Top Ad

Your Ad Spot
cuet.nta.nic.in पर जारी होने वाला है सीयूईटी रिजल्ट, यहां मिलेगा स्कोर कार्ड