आयुर्वेद को भारत की मूल राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित करने की मांग
विश्व आयुर्वेद परिषद ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री को सौंपा ज्ञापन
न्यूज़ डेस्क : मधुबनी
19:09:2026
छपरा : विश्व आयुर्वेद परिषद की ओर से जिलाधिकारी, छपरा के माध्यम से भारत की महामहिम राष्ट्रपति एवं माननीय प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपकर आयुर्वेद को भारत की मूल राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति घोषित करने की मांग की गई। परिषद ने आयुर्वेद चिकित्सा व्यवस्था को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर उच्चतम चिकित्सा संस्थानों तक आधुनिक तकनीकी संसाधनों से सुसज्जित करते हुए विकसित करने का भी आग्रह किया।विश्व आयुर्वेद परिषद राष्ट्रोत्थान को केंद्र में रखते हुए स्व-जागरण तथा आयुर्वेद के समग्र उत्थान के लिए कार्यरत स्वयंसेवी संगठन है। परिषद के अनुसार, संगठन पिछले 29 वर्षों से आयुर्वेद के विकास एवं उत्थान के लिए निरंतर सक्रिय है। ज्ञापन में भारत सरकार द्वारा आयुर्वेद के क्षेत्र में किए गए प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। परिषद ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में आयुर्वेद के विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं और इसकी प्रगति को गति मिली है। कोरोना काल के दौरान आयुर्वेद के माध्यम से किए गए प्रयासों को भी परिषद ने महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।परिषद ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के करीब 80 वर्ष बाद भी भारतीय सनातन परंपरा के अभिन्न अंग आयुर्वेद को भारत की मूल राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति का दर्जा प्राप्त नहीं है और इसे अभी भी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के रूप में देखा जाता है। परिषद के अनुसार, यह स्थिति चिंताजनक है। ज्ञापन में कहा गया कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा विज्ञान नहीं, बल्कि जीवन जीने की समग्र पद्धति और जीवन का विज्ञान है। आयुर्वेद के मनीषियों ने ज्ञान, तर्क, तथ्य एवं अनुसंधान के आधार पर इसकी व्यापक चिकित्सा अवधारणाओं को विकसित किया। वर्तमान समय में वैद्य एवं आयुर्वेद विशेषज्ञ भी आधुनिक वैज्ञानिक मानकों और निरंतर अनुसंधान के माध्यम से आयुर्वेद को अधिक साक्ष्य-आधारित बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।परिषद ने मांग की कि “पुरानी नींव, नया निर्माण” की अवधारणा पर आयुर्वेद चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। इसके तहत प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों से लेकर उच्चस्तरीय चिकित्सा संस्थानों तक आवश्यक तकनीकी संसाधन, आधुनिक सुविधाएं एवं मजबूत चिकित्सा व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया। परिषद का कहना है कि आयुर्वेद को भारत की मूल राष्ट्रीय चिकित्सा पद्धति का दर्जा दिए जाने से देश की प्राचीन चिकित्सा परंपरा को नई पहचान मिलेगी और यह भारत के “स्व-जागरण” की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। ज्ञापन सौंपने वालों में डॉ. कमलेश कुमार शर्मा, डॉ. उमाकांत प्रसाद, डॉ. अलोक चन्द पाण्डेय, डॉ. विजय कुमार, डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह तथा प्रांत महासचिव डॉ. सुधांशु शेखर त्रिपाठी शामिल रहे।


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