एक विराट व्यक्तित्व का महाप्रयाण
रिपोर्ट : उदय कुमार झा
20:09:2026
मधुबनी : बीती रात पाहीटोल (सरिसब पाही) निवासी डॉ. सदन मिश्र का निधन हो गया । महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह महाविद्यालय, सरिसब-पाही एवं विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग, लनामिवि, दरभंगा के हिन्दी विभागाध्यक्ष रह चुके डॉ. सदन मिश्र बहुमुखी प्रतिभा के धनी रहे। विराट व्यक्तित्व, सौम्य व्यवहार, मृदुल वाणी, गंभीर विद्वत्ता, प्रखर लेखनी, पुस्तक प्रणेता, सफल शिक्षक, कुशल मार्गदर्शक - जो भी इनके बारे में कहा जाए, वह कम ही होगा । डॉ. सदन मिश्र एमएलएस कॉलेज, सरिसब-पाही में एनसीसी के कम्पनी कमांडर थे। सेकंड लेफ्टिनेंट से मेजर तक बनने का उनका सफर भी काफ़ी शानदार रहा। बहुत कम लोगों को ज्ञात है कि ज़ब वे लेफ्टिनेंट थे, तभी 1971 का भारत-पाक युद्ध हुआ। उस समय एनसीसी को " 2nd Line of Defence" कहा जाता था क्योंकि एनसीसी कैडेटों को काफ़ी कड़ा प्रशिक्षण दिया जाता था। उस युद्ध में एनसीसी ग्रुप, मुजफ्फरपुर के चुनिंदा कैडेटों को लेकर लेफ्टिनेंट सदन मिश्र ASC को युद्ध में सहयोग करने तेज़पुर गए थे। इस प्रकार, उन्होंने उस लड़ाई में भी अपना विशेष योगदान दिया था।
शिक्षा के क्षेत्र में तो उनके हज़ारों छात्र उनसे शिक्षा ग्रहण कर देश-विदेश में रह रहे हैँ । वे काफ़ी प्रभावशाली वक्ता थे और समाज में भी अत्यंत लोकप्रिय और परोपकारी व्यक्तित्व के रूप में चर्चित - अर्चित रहे। उनके दोनों पुत्र - डॉ. अजय मिश्र एवं डॉ. विजय मिश्र भी यशस्वी विद्वान हैँ। उनके निधन पर पाहीटोल में उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का ताँता लग गया है । डॉ. मित्रनाथ झा (लाल), डॉ. अरविन्द कुमार सिंह झा, अतुल प्रणय (सेवानिवृत्त IRS), डॉ. रमण झा, निर्भय मिश्र, यशनाथ झा, रामबहादुर चौधरी सहित कई बुद्धिजीवियों ने दिवंगत आत्मा के प्रति अपनी शोक संवेदनाएं प्रकट की हैँ । वास्तव में, डॉ. सदन मिश्र का निधन इस इलाके के लिए एक अपूरणीय क्षति है ।


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