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शनिवार, 24 अक्टूबर 2026

मुरारी कुमार झा ने पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त किया : दरभंगा ज़िला के पुरातात्विक अध्ययन पर किया शोध

 मुरारी कुमार झा ने पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की : दरभंगा जिले के पुरातात्त्विक अध्ययन पर किया शोध




न्यूज़ डेस्क : मधुबनी 

24:10:2026



दरभंगा :  ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, कामेश्वर नगर, दरभंगा के प्राचीन भारतीय इतिहास, पुरातत्त्व एवं संस्कृति विभाग के शोधार्थी मुरारी कुमार झा ने डॉ. अरुण कुमार सिंह के निर्देशन में पूर्ण किए अपने शोध-कार्य के अंतिम साक्षात्कार के उपरांत पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। उनके शोध-प्रबन्ध का शीर्षक “दरभंगा जिला का पुरातात्त्विक अध्ययन” है। इस उपलब्धि के साथ अब वे डॉ. मुरारी कुमार झा के नाम से जाने जाएँगे।




डॉ. मुरारी कुमार झा का शोध दरभंगा जिले की पुरातात्त्विक विरासत के अध्ययन पर केंद्रित है। इस अध्ययन के अंतर्गत जिले के प्राकृतिक एवं भौगोलिक परिवेश, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, प्राचीन पुरास्थलों तथा उनसे प्राप्त पुरातात्त्विक सामग्रियों के अध्ययन को महत्त्व दिया गया है। मिट्टी, धातु एवं पत्थर से निर्मित पुरावशेषों के साथ-साथ अभिलेखों का अध्ययन दरभंगा की प्राचीन ऐतिहासिक परंपराओं को समझने की दृष्टि से विशेष महत्त्व रखता है।


डॉ. मुरारी कुमार झा लंबे समय से मिथिला की पुरातात्त्विक एवं सांस्कृतिक विरासत के अन्वेषण, अध्ययन और जन-जागरूकता के कार्यों से जुड़े रहे हैं। साइकिल से विभिन्न गाँवों, पुरास्थलों, प्राचीन मंदिरों, ऐतिहासिक स्थलों तथा प्राकृतिक धरोहरों तक पहुँचकर अध्ययन करना उनकी कार्यशैली की विशिष्ट पहचान रही है। उनके अन्वेषण कार्यों का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर बिखरी ऐतिहासिक सामग्रियों और उपेक्षित पुरास्थलों को पहचान दिलाना तथा उनके ऐतिहासिक महत्त्व के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना रहा है।


उनके शोध-कार्य की उपलब्धि को दरभंगा एवं मिथिला की पुरातात्त्विक विरासत के अध्ययन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय इतिहास, पुरास्थलों और पुरावशेषों का व्यवस्थित अध्ययन न केवल क्षेत्र के अतीत को समझने में सहायक है, बल्कि भावी शोधार्थियों के लिए भी नए अनुसंधान की संभावनाएँ प्रस्तुत करता है।


डॉ. मुरारी कुमार झा की इस उपलब्धि पर उनके परिजनों, मित्रों, शुभचिंतकों तथा पुरातत्त्व एवं इतिहास के क्षेत्र से जुड़े लोगों में प्राचीन भारतीय इतिहास पुरातत्त्व एवं संस्कृत विभाग के वर्तमान विभागाध्यक्ष, पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. अयोध्यानाथ झा, प्रख्यात इतिहासकार प्रो. रत्नेश्वर मिश्र, भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के पूर्व महानिदेशक पद्मश्री केके मुहम्मद, पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक प्रो. आलोक नाथ त्रिपाठी, वर्तमान अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. संजय मंजुल, संग्रहालय निदेशालय बिहार के अपर निदेशक डॉ शंकर सुमन, पोथीघर फाउंडेशन के सचिव आनन्द मोहन झा, वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. अवनींद्र कुमार झा एवं डॉ. शंकर देव झा, सिंगापुर के उद्यमी अंजनी चौधरी, भूगर्भ वैज्ञानिक विवेकानंद झा एवं डॉ. यशोदा नंद झा, सहायक प्राध्यापक डॉ. शांतनु कुमार आदि सैकड़ों शोधकर्ताओं, प्राध्यापकों, शोधार्थियों आदि ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। आशा व्यक्त की गई है कि वे अपनी शोध-साधना को आगे बढ़ाते हुए मिथिला की समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन, अभिलेखीकरण और जन-जागरूकता के कार्यों में निरंतर योगदान देते रहेंगे।

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