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Sunday, 22 December 2024

"राज्य, जमींदार आओर रैयत : अंतः सम्बन्धक विवेचना" विषय पर व्याख्यान आयोजित

 "राज्य, जमींदार आओर रैयत : अंतः सम्बन्धक विवेचना" विषय पर व्याख्यान आयोजित




न्यूज़ डेस्क : मधुबनी

22:12:2024




दिनांक 22/12/2024 को म. अ. रमेश्वरलता संस्कृत महाविद्यालय, दरभंगा के सभागार में पोथीघर फाउण्डेशन और म. अ. रमेश्वरलता संस्कृत महाविद्यालय के संयुक्त तत्त्वावधान में पोथीघर फाउण्डेशन द्वारा आरंभ किए गए द्वादश व्याख्यानमाला का 'राज्य, जमींदार आओर रैयत : अंतःसम्बन्धक विवेचना' विषयक द्वितीय व्याख्यान वरीय इतिहासकार डॉ अवनींद्र कुमार झा, दरभंगा द्वारा दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ दिनेश झा, प्रिंसिपल, म. अ. रमेश्वरलता संस्कृत महाविद्यालय ने की।

          व्याख्यान को संबोधित करते हुए डॉ झा ने मिथिला के राज्य, राजस्व, ग्रामीण व्यवस्था आदि को रेखांकित करते हुए कहा कि- '18वीं शताब्दी में ईस्ट इंडिया कंपनी को दीवानी प्राप्त हो गई। कंपनी ने जो पहला कार्य किया वह था जमींदारों की उत्पत्ति। राजस्व प्राप्त करने वाला 'राज्य', वसूली एवं प्रबंधन करने वाला 'जमींदार' और भुगतान करने वाले 'रैयत' हुए। जमींदारों को अधिकार सौंपते समय राज्य से एक गड़बड़ी यह हुई कि जो अधिकार उन्हें नहीं देनी चाहिए थी, वह भी उनको दे दिया। परिणामस्वरूप जमींदारों के नीचे भी जमींदार पनपती चली गई, जिससे राजस्व में वृद्धि स्वाभाविक थी। परिणामस्वरूप संन्यासी विद्रोह हुआ, जिसका केंद्र पूर्णिया था। इस तरह जमींदारों को जमीन संबंधी दस्तावेजों का अधिकार देना, सबसे बड़ी भूल साबित हुई। ऐसा नहीं है कि जमींदारों ने रैयतों के हित में कार्य नहीं किए। पहली बार राज दरभंगा द्वारा सिंचाई व्यवस्था हवेली खड़गपुर में आरंभ की गई। अभी सरकार के पास कैडस्टल सर्वे ही सबसे महत्त्वपूर्ण मानक है।' 

         प्रश्नोत्तरी में प्रकाश कुमार, गुंजन कुमारी आदि ने वक्ता महोदय से अपने प्रश्नों का समुचित उत्तर प्राप्त किया।

         अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ दिनेश झा ने कहा कि- 'सामाजिक संतुलन हेतु राज्य, जमींदार और रैयत के बीच सामंजस्यता सबसे आवश्यक होता है। इस तरह के समाजोपयोगी कार्यक्रम आयोजित होती रहनी चाहिए, जिसके लिए पोथीघर फाउण्डेशन के द्वारा उठाया गया यह कदम अनुकरणीय है।' 

           पोथीघर फाउण्डेशन का नारा "लाउ व्यवहार मे, पोथी उपहार मे" के तहत पोथीघर फाउण्डेशन की अध्यक्षा श्रीमती गुड़िया झा के द्वारा वक्ता और आयोजन समन्वयक श्री राजनाथ पंडित के द्वारा अध्यक्ष महोदय को पोथी उपहार स्वरूप प्रदान किया गया। 

         कार्यक्रम का संचालन श्री आशुतोष मिश्र ने और धन्यवाद ज्ञापन पोथीघर फाउण्डेशन के सचिव श्री आनंद मोहन झा ने किया। अगले महीने आयोजित होने वाली व्याख्यान का विषय है, 'मिथिलाक पुरातत्त्व आ मृण मूर्ति काल निर्धारण' जिसके वक्ता होंगे डॉ शंकर सुमन, संग्रहालयाध्यक्ष, चन्द्रधारी संग्रहालय, दरभंगा।

         इस मौक़े पर डा शंकर देव झा, श्री मोदनाथ मिश्र, डा पवन कुमार झा, डा राम सेवक झा, डा मैथिली कुमारी, गुड़िया झा, डा मुकेश प्रसाद, डा कृष्णानंद मिश्र, मुरारी कुमार झा, श्री राहुल चौधरी, अमित मिश्र, पूर्णिमा कुमारी, पुष्पांजली कुमारी, रौशन कुमार झा, सुमित श्री सहित कई प्रोफ़ेसर, शोधार्थी, भाषा प्रेमी एवं छात्र-छात्राएं मौजूद थे।

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