सतत विकास की दिशा में विज्ञान: सप्ता में बाल विज्ञान कांग्रेस प्रदर्शनी में दिखा ऑटोमेटिक प्लांट वाटरिंग सिस्टम
रीजनल सेकेंडरी स्कूल सप्ता ने स्टेट लेवल चिल्ड्रन साइंस कांग्रेस 2026-27 के तहत सस्टेनेबिलिटी मॉडल्स का प्रदर्शन किया
सिटी रिपोर्टर
मधुबनी
रीजनल सेकेंडरी स्कूल में ,मंगलवार को राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस 2026-27 के तहत एक विशाल विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन मीटिंग हॉल में दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता स्कूल के डायरेक्टर राम श्रृंगार पांडे ने की। उन्होंने कहा कि "हमारा ज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका उपयोग समाज और प्रकृति के हित में होना चाहिए।"
मुख्य अतिथि जिला शिक्षा पदाधिकारी अक्षय लाल ठाकुर ने विज्ञान प्रदर्शनी को संबोधित करते हुए कहा कि सस्टेनेबल एनवायरनमेंट, डिफरेंट टाइप ऑफ पर्सन, नेक्स्ट जेनरेशन, वेस्ट मैनेजमेंट, प्रयोगशाला आधारित शिक्षा और क्लास से निकल कर जीवन में विज्ञान के महत्व को समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ग्रास रूट लेवल पर, छोटे-छोटे बातों से बड़ा काम करना है, लिहाजा माइक्रो लेवल पर काम करना, सेव एनर्जी और विषय "निरंतरता के लिए विज्ञान एवं नवाचार - साइंस एंड इनोवेशन फॉर सस्टेनेबिलिटी" को जीवन में उतारने की जरूरत है।
प्रदर्शनी का विशेष आकर्षण छात्रों द्वारा निर्मित ऑटोमेटिक प्लांट वाटरिंग सिस्टम रहा। इस मॉडल में आर्डुइनो, मॉइश्चर सेंसर, रिले मॉड्यूल, वाटर टैंक और लो-लेवल सेंसर का उपयोग किया गया है।
मॉडल की कार्यप्रणाली: पौधे की मिट्टी में मॉइश्चर सेंसर लगाया गया है जो मिट्टी की नमी को मापता है। जब नमी निर्धारित स्तर से नीचे चली जाती है तो सेंसर आर्डुइनो को सिग्नल भेजता है। आर्डुइनो रिले को एक्टिव करता है जिससे वाटर टैंक से पौधे तक स्वतः पानी पहुंच जाता है। टैंक में लगा लो-लेवल सेंसर पानी के स्तर की निगरानी करता है।
छात्रों के अनुसार इस तकनीक से जल की बर्बादी रोकी जा सकती है और तकनीक की मदद से प्रकृति की रक्षा की जा सकती है। यह जरूरत-अनुसार सिंचाई का व्यावहारिक उदाहरण है।
मौके पर डीपीओ, प्रोफेसर्स, शिक्षाविद, प्रिंसिपल मनोज कुमार झा, डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर एस.एन. ठाकुर, रोज पब्लिक स्कूल और गवर्नमेंट स्कूल्स के बच्चे उपस्थित थे।
मौके पर शिक्षक जितेंद्र सिंह यादव, श्वेता रानी, आयुष कुमार चौरसिया, अजय कुमार और रागिनी कुमारी ने संयुक्त रूप से किया। उनके मार्गदर्शन में तैयार मॉडल्स ने विज्ञान, तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के समन्वय को प्रस्तुत किया।
बाल विज्ञान कांग्रेस का समन्वय साइंस फॉर सोसाइटी, बिहार द्वारा एनसीएसटीसी, डीएसटी, भारत सरकार, एससीईआरटी और बी.सी.एस.टी., बिहार के सहयोग से किया जा रहा है। गतिविधि निर्देशिका पुस्तिका का वितरण भी किया गया जिससे छात्र जिला और राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए तैयारी कर सकें।


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